सन्दर्भ :-

  • ये खबर निश्चित ही चिंता बढ़ाने वाली है कि पिछले साल की तुलना में वैश्विक भुखमरी सूचकांक (ग्लोबल हंगर इंडेक्स- जीएचआई) में भारत तीन पायदान नीचे उतर गया है।
  • वर्ष 2016 में इस सूचकांक में भारत 119 देशों में 97वें स्थान पर था।
  • अब 100वें नंबर पर है। क्या यह तथ्य हमारे लिए गहरी चिंता का कारण नहीं होना चाहिए कि इस सूचकांक में उत्तर कोरिया, बांग्लादेश और इराक जैसे देश भी भारत से ऊपर रहे हैं?

मुख्य बिंदू :-

  • जीएचआई चार संकेतकों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जाता है। ये हैं- आबादी में कुपोषणग्रस्त लोगों की संख्या, बाल मृत्युदर, अविकसित बच्चों की संख्या और अपनी उम्र की तुलना में छोटे कद और कम वजन वाले बच्चों की तादाद।
  • वॉशिंगटन स्थित इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट (आईएफपीआरआई) द्वारा तैयार भुखमरी सूचकांक में भारत पहले से काफी नीचे आता रहा है। इसकी प्रमुख वजह यहां कुपोषणग्रस्त बच्चों की बड़ी संख्या है।
  • भारत दुनिया की सबसे तेजी से आगे बढ़ती दो अर्थव्यवस्थाओं में एक है। दुनिया की एक महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में आज इसकी प्रतिष्ठा है।
  • इसके बावजूद भुखमरी सूचकांक में इतना पीछे होना हम सबके लिए गहरे आत्म-मंथन का विषय होना चाहिए।
  • अधिक फिक्र की बात इस मोर्चे पर अपने देश का इस वर्ष और पिछड़ जाना है। वाशिंगटन स्थित इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट (आईएफपीआरआई) द्वारा जारी ग्लोबल हंगर इंडेक्स-2016 के मुताबिक,118 देशों की लिस्ट में भारत का स्थान 97वां है.
  • भारत में 5 में से हर दूसरा बच्चा कुपोषण का शिकार है.
  • साल 2000 से भारत में भुखमरी और कुपोषण जैसे मामलों में 29 परसेंट की कमी तो आई है, पर आज भी 15.2 परसेंट लोगों को आधा पेट खाकर ही सोना पड़ता है, जिनमें 39 परसेंट बच्चे कुपोषित है.
  • ग्लोबल हंगर इंडेक्स की इस लिस्ट में भारत का स्कोर 28.5 है, जो विकासशील देशों की तुलना में काफी ज्यादा है.2016 के आंकड़े के अनुसार, एशियाई देशों में पाकिस्तान और भारत की सबसे ज्यादा बुरी हालत है.

दो हिस्सों में बंटा हुआ देश

  • अगर हम रिपोर्ट पर गौर करें, तो देश दो हिस्सों में बंटता हुआ दिखाई दे रहा है.
  • एक तरफ समृद्ध भारत, दूसरी तरफ गरीब तबका. रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार का मुख्य उद्देश्य रोजी-रोजगार को विकसित करना होना चाहिए.
  • लेकिन सरकार द्वारा बनाई गई इन योजनाओं में बजट की कटौती के चलते इन पर पूरी तरह काम नहीं हो पा रहा है.

क्या है ग्लोबल हंगर इंडेक्स?

  • अलग-अलग देशों में लोगों को खाने की चीज़ें कैसी और कितनी मिलती हैं यह उसे दिखाने का साधन है.
  • 'ग्लोबल हंगर इंडेक्स' का सूचकांक हर साल ताज़ा आंकड़ों के साथ जारी किया जाता है.
  • इस सूचकांक के ज़रिए विश्व भर में भूख के ख़िलाफ़ चल रहे अभियान की उपलब्धियों और नाकामियों को दर्शाया जाता है.
  • इस तरह के सर्वेक्षण की शुरुआत इंटरनेशनल फ़ूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट ने की और वेल्ट हंगरलाइफ़ नामक एक जर्मन स्वयंसेवी संस्थान ने इसे सबसे पहले वर्ष 2006 में जारी किया था.
  • वर्ष 2007 से इस अभियान में आयरलैंड का भी एक स्वयमसेवी संगठन शामिल हो गया.
  • इस बार से रिपोर्ट को संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावित 2030 के एजेंडे से भी जोड़ा गया है जिसमे 'जीरो हंगर' का लक्ष्य रखा गया है.

कैसे समझें 'ग्लोबल हंगर इंडेक्स' को?

  • 'ग्लोबल इंडेक्स स्कोर' ज़्यादा होने का मतलब है उस देश में भूख की समस्या अधिक है.
  • उसी तरह किसी देश का स्कोर अगर कम होता है तो उसका मतलब है कि वहाँ स्थिति बेहतर है.
  • इसे नापने के चार मुख्य पैमाने हैं - कुपोषण, शिशुओं में भयंकर कुपोषण, बच्चों के विकास में रुकावट और बाल मृत्यु दर.

ग्लोबल हंगर इंडेक्स की रिपोर्ट

  • एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में भूख एक गंभीर समस्या है और 119 देशों के वैश्विक भूख सूचकांक में भारत 100वें पायदान पर है।
  • भारत उत्तर कोरिया और बांग्लादेश जैसे देशों से पीछे है लेकिन पाकिस्तान से आगे है।
  • इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टिट्यूट (IFPRI) ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि बच्चों में कुपोषण की उच्च दर से देश में भूख का स्तर इतना गंभीर है और सामाजिक क्षेत्र को इसके प्रति मजबूत प्रतिबद्धता दिखाने की जरूरत है।
  • पिछले वर्ष भारत इस सूचकांक में 97वें स्थान पर था।
  • IFPRI ने एक बयान में कहा, '119 देशों में भारत 100वें स्थान पर है और समूचे एशिया में सिर्फ अफगानिस्तान और पाकिस्तान उससे पीछे हैं।
  • उन्होंने कहा, '31.4 के साथ भारत का 2017 का GHI (ग्लोबल हंगर इंडेक्स) गंभीर श्रेणी में है। यह उन मुख्य कारकों में से एक है जिसकी वजह से दक्षिण एशिया इस साल GHI में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों में से एक है...।
  • ' रिपोर्ट के मुताबिक भारत की रैंकिंग चीन (29), नेपाल (72), म्यांमार (77), श्रीलंका (84) और बांग्लादेश (88) से भी पीछे है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान क्रमश: 106वें और 107वें स्थान पर हैं।

निष्कर्ष

  • नरेंद्र मोदी सरकार ने जन-कल्याण के कार्यक्रमों को प्रभावी और भ्रष्टाचार-मुक्त बनाने पर खास ध्यान दिया है।
  • उसने सत्ता में आने के बाद विकास नीति पर नया नजरिया अपनाया। उसका जोर राज्यों को सशक्त करने पर रहा है।
  • सोच यह है कि राज्य सरकारें अपनी खास जरूरतों के मुताबिक कल्याणकारी योजनाओं को बेहतर स्वरूप देंगी और उन्हें अधिक उत्तरदायित्व के साथ लागू करेंगी। लेकिन इस बीच आखिर कहां चूक हो रही है? समस्या नीतिगत है या खामी अमल में है, इसका अविलंब ठोस आकलन किया जाना चाहिए।