सन्दर्भ

  • भारत की अक्षय ऊर्जा क्षमता 2022 तक बढ़कर दोगुनी हो जाएगी।
  • पहली बार ऐसा होगा जब अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में विस्तार के मामले में भारत यूरोपीय संघ से आगे निकल जाएगा।

मुख्य बिन्दु

  • अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) ने एक रिपोर्ट में यह बात कही।
  • सरकार के ताजा आंकड़े के अनुसार देश की अक्षय ऊर्जा की स्थापित क्षमता 58,300 मेगावाट है।
  • सरकार ने 2022 तक इसे बढ़ाकर 1,75,000 मेगावाट रखने का लक्ष्य रखा है।
  • इसमें 1,00,000 मेगावाट क्षमता सौर ऊर्जा की होगी।
  • आईईए ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा, 2022 तक भारत की अक्षय ऊर्जा क्षमता दोगुने से अधिक हो जाएगी।
  • यह अक्षय ऊर्जा विस्तार में यूरोपीय संघ को पहली बार पछाड़ने के लिए पर्याप्त होगा।
  • एजेंसी ने कहा कि सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा देश की क्षमता वृद्धि में 90 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं।
  • नीलामी में इन दोनों प्रौद्योगिकियों के लिए सबसे कम कीमतें उभरकर सामने आई हैं।
  • भारतीय सौर ऊर्जा निगम द्वारा कराई गई नीलामी में सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा की कीमतें क्र मश: 2.44 रपए प्रति इकाई तथा 3.46 रपए प्रति इकाई के रिकार्ड निचले स्तर पर आ गई।
  • उसने कहा कि 2022 तक चीन, भारत और अमेरिका की नियंतण्र अक्षय ऊर्जा में दो तिहाई हिस्सेदारी रहेगी।
  • महज सौर ऊर्जा का उत्पादन तब भारत और जापान के अभी के कुल ऊर्जा उत्पादन से अधिक होगा।
  • एजेंसी ने कहा कि चीन अभी भी अक्षय ऊर्जा विस्तार के मामले में अग्रणी बना हुआ है।

आईईए की रिपोर्ट

  1. देश की मौजूदा अक्षय ऊर्जा क्षमता है 58,300 मेगावाट.
  2. पांच साल में बढ़ा कर 1.75 लाख मेगा वाट करने का लक्ष्य.
  3. इसमें एक लाख मेगावाट क्षमता सौर ऊर्जा की होगी शामिल.

आईईए क्या हैं

  • इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आईईए) 1974 में 1974 के मद्देनजर आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) के संगठन के ढांचे में स्थापित एक पेरिस स्थित स्वायत्त अंतरसरकारी संगठन है।
  • आईईए शुरू में तेल की आपूर्ति में उत्त्पन अवरोधों का जवाब देने के लिए समर्पित था, साथ ही इसे अंतर्राष्ट्रीय तेल बाजार में और अन्य ऊर्जा क्षेत्रों के बारे में एवं आँकड़ों के बारे में जानकारी स्रोत के रूप में कार्य करना था ।

अक्षय ऊर्जा

अक्षय उर्जा या नवीकरणीय ऊर्जा में वे सारी उर्जा शामिल हैं जो प्रदूषणकारक नहीं हैं तथा जिनके स्रोत का क्षय नहीं होता, या जिनके स्रोत का पुनः-भरण होता रहता है। सौर ऊर्जापवन ऊर्जाजलविद्युत उर्जाज्वार-भाटा से प्राप्त उर्जाबायोमासजैव इंधन आदि नवीनीकरणीय उर्जा के कुछ उदाहरण हैं।


अक्षय ऊर्जा का महत्व

ऊर्जा आधुनिक जीवन शैली का अविभाज्य अंग बन गयी है। ऊर्जा के बिना आधुनिक सभ्यता के अस्तित्व पर एक बहुत बडा प्रश्न-चिह्न लग जायेगा।

  • अक्षय ऊर्जा, अक्षय विकास का प्रमुख स्तम्भ है।
  • अक्षय उर्जा, ऊर्जा का ऐसा विकल्प है जो असीम (limitless) है।
  • ऊर्जा का पर्यावरण से सीधा सम्बन्ध है। ऊर्जा के परम्परागत साधन (कोयला, गैस, पेट्रोलियम आदि) सीमित मात्रा में होने के साथ-साथ पर्यावरण के लिये बहुत हानिकारक हैं।
  • दूसरी तरफ ऊर्जा के ऐसे विकल्प हैं जो पूरणीय हैं तथा जो पर्यावरण को कोई हानि नहीं पहुंचाते।
  • वैश्विक गर्मी (ग्लोबल वार्मिंग) तथा जलवायु परिवर्तन से बचाव

अक्षय ऊर्जा स्रोत वर्ष पर्यन्त अबाध रूप से भारी मात्रा में उपलब्ध होने के साथ साथ सुरक्षित, स्वत: स्फूर्त व भरोसेमंद हैं। साथ ही इनका समान वितरण भी संभव है। भारत में अपार मात्रा में जैवीय पदार्थ, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बायोगैस व लघु पनबिजली उत्पादक स्रोत हैं। २१वीं शताब्दी का स्वरूप जीवाश्म ऊर्जा के बिना निर्धारित होने वाला है जबकि २०वीं शताब्दी में वह उसके द्वारा निर्धारित किया गया था। पूरे विश्व में, कार्बन रहित ऊर्जा स्रोतों के विकास व उन पर शोध अब प्रयोगशाला की चाहरदीवारी से बाहर आकर औद्योगिक एवं व्यापारिक वास्तविकता बन चुके हैं।


भारत और अक्षय ऊर्जा

देश का अपारम्परिक ऊर्जा कार्यक्रम विश्व के इस प्रकार के विशालतम कार्यक्रमों में से एक है। इसके अन्तर्गत विभिन्न प्रौद्योगिकी, बायोगैस, समुन्नत चूल्हे, बायोमास cepik गैसीफायर, शीघ्र बढ़ने वाली वृक्ष-प्रजातियां, जैवीय पदार्थ का दहन एवं सह-उत्पादन, पवन-चक्कियों द्वारा जल निकासी, वायु टर्बाइनों द्वारा शक्ति का उत्पादन, सौर तापीय व फोटो वोल्टायिक प्रणालियाँ, नागरीय घरेलू तथा औद्योगिक अवजल व कचरे से ऊर्जा उत्पादन, हाइड्रोजन ऊर्जा, समुद्री ऊर्जा, फुएल सेल, विद्युत चालित वाहन (बसें) व परिवहन के लिए वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर कार्य हो रहा है।
आने वाले कुछ हजार वर्षों में ही हमारे परम्परागत ऊर्जा स्रोत समाप्त हो जायेंगे। जिसे बनाने में प्रकृति ने लाखों वर्ष लगाएं है उसे हम कुछ ही मिनटों में समाप्त कर देते हैं। पर्यावरणीय प्रदूषण, सामाजिक एवं आर्थिक दबाव तथा राजनीतिक उठापटक समस्या को और गंभीर बनाते हैं। अतएव नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का विकास व प्रयोग तथा इस हेतु दृढ़ इच्छा शक्ति का होना आज की आवश्यकता है।

भारत : अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी का एसोसिएशन देश

    • ‘अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी’ (IEA) के अनुसार, भारत में विश्व की 18 प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है, लेकिन वैश्विक ऊर्जा उपभोग में इसकी हिस्सेदारी मात्र 6 प्रतिशत ही है।
    • वर्ष 2000 से अब तक भारत के ऊर्जा उपभोग में लगभग दोगुने की वृद्धि हो चुकी है, फिर भी वर्तमान में देश के 240 मिलियन लोगों तक विद्युत की पहुंच नहीं है।
    • अतः देश के नागरिकों की ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ-साथ ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने की दृष्टि से भी भारत द्वारा अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के ‘एसोसिएशन देश’ का दर्जा प्राप्त करना एक महत्वपूर्ण कदम है।
    • 30 मार्च, 2017 को भारत ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के ‘एसोसिएशन देश’ (Association Country) का दर्जा प्राप्त कर लिया।
    • इससे संबंधित घोषणा नई दिल्ली में एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान की गई जिसमें आईईए के कार्यकारी निदेशक डॉ. फतीह बिरोल; विद्युत, कोयला,नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा तथा खान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पीयूष गोयल और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र प्रधान शामिल थे।
    • यह दर्जा प्राप्त करने के बाद अब भारत को आईईए की प्रशासनिक संरचना का गठन करने वाले स्थायी समूहों (Standing Groups), समितियों तथा कार्यकारी समूहों की बैठकों में भाग लेने का अवसर प्राप्त हो सकेगा।
    • आईईए के साथ भारत की भागीदारी आईईए के सदस्य एवं अन्य संबंधित देशों को ऊर्जा दक्षता एवं नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में समृद्ध करेगी।ज्ञातव्य है कि अभी तक भारत आईईए का भागीदार देश (Partner Country) था।
    • उल्लेखनीय है कि भारत एवं अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के मध्य सहयोग की शुरुआत वर्ष 1998 में ‘सहयोग के घोषणा-पत्र’ (Declaration of Co-operation) पर हस्ताक्षर होने के साथ हुई थी।
    • इस घोषणा-पत्र में ऊर्जा सुरक्षा एवं सांख्यिकी से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल थे।
    • तेल एवं गैस सुरक्षा, भारत एवं आईईए के मध्य सहयोग हेतु प्राथमिकता के क्षेत्रों में शामिल है तथा इससे संबंधित समझौता-ज्ञापन (MoU) पर आईईए और केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने वर्ष 2011 में हस्ताक्षर किए थे।
    • यह प्रथम अवसर था जब आईईए ने ‘आकस्मिक तैयारी’ (Emergency Pre-paredness) के क्षेत्र में किसी प्रमुख साझीदार देश के साथ समझौता-ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया था।
    • वर्ष 2015 में आईईए ने भारत के ‘पेट्रोलियम संरक्षण अनुसंधान संघ’ (PCRA) के साथ भागीदारी में एवं अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के सहयोग से ‘भारी वाहनों’ (Heavy Duty Vehicles) के लिए विनियमों का विकास किया था।
    • वर्ष 2016 में पूर्वानुमान एवं डाटा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने के उद्देश्य से भारत एवं आईईए ने एक आशय-पत्र पर हस्ताक्षर किए थे।
    • ज्ञातव्य है कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी एक स्वायत्त अंतर-सरकारी संगठन है जिसका सचिवालय पेरिस, फ्रांस में स्थित है।
    • वर्ष 1974 में स्थापित यह एजेंसी मुख्य रूप से अपने 29 सदस्य देशों (Member Countries) हेतु विश्वसनीय, वहनीय एवं स्वच्छ ऊर्जा तक पहुंच को सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य करती है।
    • ओईसीडी (Organisation for Economic Co-operation and Development:OECD) की सदस्यता प्राप्त देश को ही आईईए की सदस्यता प्रदान करने पर विचार किया जाता है।
    • हालांकि मात्र ओईसीडी की सदस्यता प्राप्त कर लेने से ही कोई देश आईईए की सदस्यता के योग्य नहीं हो जाता, उसे अन्य कई शर्तों को भी संतुष्ट करना होता है।
    • उदाहरणस्वरूप वर्तमान में चिली, आइसलैंड, इस्राइल, मेक्सिको तथा स्लोवेनिया ओईसीडी के सदस्य देश हैं, लेकिन वे आईईए के सदस्य नहीं हैं।
    • वर्तमान में चिली एवं मेक्सिको आईईए की सदस्यता हेतु उम्मीदवार (Accession Countries) हैं।
    • 29 सदस्य देशों के अतिरिक्त आईईए के भारत सहित 6 एसोसिएशन देश भी हैं।
    • अन्य 5 एसोसिएशन देश हैं-चीन, इंडोनेशिया, थाईलैंड, सिंगापुर एवं मोरक्को।
    नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश

    नीचे की सारणी में विश्व के कुछ प्रमुख क्षेत्रों में नवीकरणीय ऊर्जा पर प्रति वर्ष निवेश दिखाया गया है।

    देश/संघ

    2004

    2005

    2006

    2007

    2008

    2009

    2010

    2011

    2012

    2013

    प्रतिशत परिवर्तन
    2013/2012

    यूएसए

    5,5

    11,7

    28,2

    33,6

    35,9

    23,5

    34,7

    53,4

    39,7

    35,8

    -10%

    यूरोपीय संघ

    19,7

    29,4

    39,1

    61,8

    73,4

    75,3

    102,4

    114,8

    86,4

    48,4

    -44%

    चीन

    2,4

    5,8

    10,1

    15,8

    24,9

    37,1

    36,7

    51,9

    59,6

    56,3

    -5%

    भारत

    2,5

    2,9

    4,4

    6,3

    5,4

    4,2

    8,7

    12,6

    7,2

    6,1

    -15%

    विश्व

    39,5

    64,5

    99,6

    145,9

    171,2

    168,4

    226,7

    279,4

    249,5

    214,4

    -14%