सन्दर्भ :-

  • एक साथ दो परियोजनाओं की इन दिनों काफी चर्चा है। इनमें एक है राजमार्गों के लिए बनी भारतमाला परियोजना और दूसरी, जलमार्गों के लिए बनी सागरमाला परियोजना। 83,000 किलोमीटर लंबी भारतमाला परियोजना की तो घोषणा भी कर दी गई है, जबकि गुजरात में रो-रो फेरी सेवा के साथ ही सागरमाला का भी आगाज हो गया है।
  • तटीय नौवहन और जलमार्ग से ढुलाई को अगले सात साल में छह फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी करने का लक्ष्य रखा गया है।
  • इस समय देश में सिर्फ छह राष्ट्रीय जलमार्ग हैं। अब 111 नए नदी मार्गों को तैयार करने की योजना है।

मुख्य बिंदू :-

  • बयद्यपि देश में लगभग 46.90 लाख किलोमीटर लंबाई की सड़कों का विशाल नेटवर्क है।
  • राजमार्गों के विकास के लिए देश में राष्ट्रीय राजमार्ग विकास कार्यक्रम की 1998 में शुरुआत की गई थी, जिसके तहत स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना के नेटवर्क से चेन्नई, कोलकाता, दिल्ली और मुंबई को जोड़ा गया था। यह भारत में सबसे बड़ी राजमार्ग परियोजना है और दुनिया में पांचवां क्रम रखती है।
  • हालांकि इस परियोजना को 2006 में पूरा होना था, लेकिन इसे 2012 में पूरा किया जा सका।
  • उम्मीद की जानी चाहिए कि इस बार ऐसी देरी से बचा जा सकेगा। भारतमाला परियोजना से मौजूदा राजमार्ग बुनियादी ढांचे के अंतर को पाटने में मदद मिलेगी।
  • इससे यात्रियों और माल की आवाजाही सुगम हो जाएगी। सबसे बड़ी बात है कि इससे ग्रामीण इलाकों में भी सड़कों के विकास को गति मिलेगी।
  • राजमार्गों के तेजी से विकास से निजी क्षेत्र के लिए अवसर बढ़ेंगे। छोटे शहरों में औद्योगिक विकास को प्रोत्साहन मिलेगा और नौकरी के अवसरों में वृद्धि होगी।
  • ग्रामीण इलाकों से उपज की बेहतर परिवहन व्यवस्था के कारण किसानों के लिए अवसर बढ़ेंगे। भारतमाला परियोजना पहली बार अप्रैल 2015 में पेश की गई थी, जिसमें गुजरात और राजस्थान को जोड़ने की योजना थी। उसके बाद इसमें पंजाब, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड को शामिल किया गया और बाद में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार के साथ सिक्किम, असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और मिजोरम में भारत-म्यांमार सीमा तक इसे बढ़ा दिया गया।
  • इसके तहत 44 आर्थिक गलियारे बनेंगे। 26,200 किलोमीटर लंबे आर्थिक गलियारों में से 9,000 किलोमीटर आर्थिक गलियारे का विकास पहले चरण में होगा।
  • इस परियोजना के लिए 70 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार खर्च करेगी और 30 फीसदी हिस्सा निजी भागीदारी से आएगा। यह भी अनुमान है कि इस योजना से 14.2 करोड़ कार्यदिवस का रोजगार पैदा हो सकेगा।
  • ऐसी ही उम्मीदें सागरमाला से भी हैं। देश के पास 7,500 किलोमीटर तटीय क्षेत्र हैं, जबकि 14,500 किलोमीटर नदीमार्ग हैं।
  • लागत के हिसाब से देखा जाए, तो एक हॉर्स पावर शक्ति की ऊर्जा से पानी में चार टन माल ढोया जा सकता है, जबकि इतनी ही ऊर्जा से सड़क पर 150 किलो और रेल से 500 किलो माल ही ढोया जा सकता है।
  • यही कारण है कि यूरोप, अमेरिका, चीन तथा पड़ोसी बांग्लादेश में काफी मात्रा में माल की ढुलाई अंतरदेशीय जल परिवहन तंत्र से हो रही है। कई यूरोपीय देश अपने कुल माल और यात्री परिवहन का 40 प्रतिशत पानी के जरिए ढोते हैं।
  • यूरोप के कई देश आपस में इसी साधन से बहुत मजबूती से जुड़े हैं। निस्संदेह हमारे देश के विशाल जलमार्ग और विशाल नदियों के कारण जल परिवहन के तहत माल ढुलाई संबंधी जरूरतों की पूर्ति के लिए बहुत संभावनाएं हैं।
  • हमारी कई बड़ी विकास परियोजनाएं राष्ट्रीय जलमार्गों के नजदीक साकार होने जा रही हैं। बहुत से नए कारखाने और पनबिजली इकाइयां इन इलाकों में खुल चुकी हैं।
  • इनके निर्माण में भारी-भरकम मशीनरी की सड़क से ढुलाई आसान काम नहीं है। इसमें जल परिवहन की अहम भूमिका हो सकती है।

भारतमाला परियोजना

  • भारतमाला परियोजना एक राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना हैं। इसके तहत नए राजमार्ग के अलावा उन परियोजनाओं को भी पूरा किया जाएगा तो अब तक अधूरे हैं।
  • इसमें सीमा और अंतर्राष्ट्रीय संयोजकता वाले विकास परियोजना को शामिल किया गया है। बंदरगाहों और सड़क, राष्ट्रीय गलियारों (नेशनल कॉरिडोर्स) को ज्यादा बेहतर बनाना और राष्ट्रीय गलियारों को विकसित करना भी इस परियोजना में शामिल है।
  • इसके अलावा पिछडे इलाकों, धार्मिक और पर्यटक स्थल को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग बनाए जाएंगे। चार धाम केदारनाथ, बद्रीनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री के बीच संयोजकता बेहतर की जाएगी।
  • सड़कों के विस्तार एवं विकास के लिए बने, 10 लाख करोड़ रुपये के भारतमाला परियोजना, में कई प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना (एनएचडीपी) जिसें 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार द्वारा लॉन्च किया था, सहित सभी मौजूदा राजमार्ग परियोजनाओं को इसमें समाहित कर लिया जायेगा।
  • यह परियोजना गुजरात और राजस्थान से शुरू हो कर, पंजाब कि ओर चलेगी और फिर पूरे हिमालयी राज्यों - जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड - और तराई इलाकों के साथ उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमाओं को कवर करेगी और पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और मिजोरम में भारत-म्यांमार की सीमा तक जायेगी।
  • आदिवासी और पिछड़े क्षेत्रों सहित दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में कनेक्टिविटी प्रदान करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।सरकार के मुताबिक योजना के पूरा होने पर, भारतमाला के तहत राजमार्ग की कुल लंबाई 51,000 किलोमीटर होगी।
  • इसके पहले चरण में 29,000 किलोमीटर का विकास 5,5 खरब के परिव्यय के साथ किया जाएगा।
सड़क का प्रकारकिमी
आर्थिक कॉरिडोर 9,000
अंतर-गलियारे और फीडर मार्ग 6,000
राष्ट्रीय कॉरिडोर दक्षता कार्यक्रम 5,000
सीमा और अंतर्राष्ट्रीय कनेक्टिविटी सड़कें 2,000
तटीय और बंदरगाह कनेक्टिविटी सड़कें 2,000
एक्सप्रेसवे 800
भारतमाल पारियोजन पहला-चरण के तहत कुल 24,800
राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना (एनएचडीपी) के तहत शेष राष्ट्रीय राजमार्ग 10,000
पहले-चरण के अंत तक कुल विकसित सडक (किमी) 34,800

सागरमाला परियोजना

  • सागर माला परियोजना  भारत के बंदरगाहों के आधुनिकीकरण के लिए भारत सरकार की एक रणनीतिक और ग्राहक-उन्मुख पहल है जिससे पोर्ट के नेतृत्व वाले विकास को बढ़ाया जा सके और भारत के विकास में योगदान करने के लिए तट रेखाएं विकसित की जा सकें।
  • यह मौजूदा बंदरगाहों को आधुनिक विश्वस्तरीय बंदरगाहों में रूपांतरित करने और सड़क, रेल, अंतर्देशीय और तटीय जलमार्गों के माध्यम से बंदरगाहों, औद्योगिक समूहों और दूरदराज के इलाकों और कुशल निकास प्रणालियों के विकास को एकीकृत करने की दिशा में दिख रहा है जिसके परिणामस्वरूप तटीय क्षेत्रों में बंदरगाह आर्थिक गतिविधियों के ड्राइवर बन सकेंगे
सागरमाला परियोजना की पृष्ठभूमि

  • 25 मार्च 2015 को कैबिनेट ने भारत के 12 बंदरगाहों और 1208 द्वीप समूह को विकसित करने के लिए इस परियोजना को मंजूरी दे दी।
  • परियोजना 31 जुलाई 2015 को कर्नाटक में नौवहन मंत्रालय (इस पहल के लिए नोडल मिनिस्ट्री) द्वारा होटल ताज वेस्ट एंड, बैंगलोर में शुरू की गई थी।कार्यक्रम का उद्देश्य भारत के 7,500 किलोमीटर लंबी तटीय समुद्र तट, 14,500 किलोमीटर की संभावित जलमार्ग और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर रणनीतिक स्थान का उपयोग करके देश में बंदरगाह के विकास को बढ़ावा देना है।
  • सागरमाला के लिए आंध्र प्रदेश सरकार ने 36 परियोजनाएं प्रस्तावित की हैं। भारतीय तटीय क्षेत्र को तटीय आर्थिक क्षेत्र (सीईआर) के रूप में विकसित किया जाएगा।
  • 20 जुलाई 2016 को भारतीय मंत्रिमंडल ने 1000 करोड़ रूपए की प्रारंभिक प्राधिकृत शेयर पूंजी और 90 करोड़ रूपये की साझेदारी पूंजी के साथ सागरमाला डेवलपमेंट कंपनी को मंजूरी दे दी थी, जिससे पोर्ट-डिमांड के विकास को बढ़ावा मिला।सागरमाला राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना 14-अप्रैल-2016 को परियोजना और कार्यान्वयन के विवरण के साथ जारी की गई थी।
  • एक रिपोर्ट में कहा गया है कि सागर माला परियोजना के तहत बंदरगाह के विकास के लिए सरकार की महत्वाकांक्षी गति से 2025 तक रसद लागत में 40,000 करोड़ रुपये की बचत होगी।
सागरमराला परियोजना में छः मेगापोर्ट को बनाने की योजना बनाई गई है।

क्र.सं.

नया बंदरगाह स्थान

राज्य

वर्तमान स्थिति

1.

सागर द्वीप

पश्चिम बंगाल

सागर द्वीप में बडा सागर बंदरगाह की स्थापना के लिए स्वीकृति प्राप्त की गई। डीपीआर ने तैयारी की। राज्य सरकार द्वारा पश्चिम बंगाल के ताजपुर में नए बंदरगाह ताजपुर बंदरगाह के उद्घाटन के मद्देनजर व्यवहार्यता की फिर से जांच की जा रही है।

2.

पारादीप बाहरी हार्बर

ओडिशा

तैयारी के तहत डीपीआर।

3.

सिर्खजी

तमिलनाडु

टेक्नो आर्थिक व्यवहार्यता रिपोर्ट (टीईएफआर) तैयार की गई।

4.

इनायम

तमिलनाडु

इनायत में प्रमुख बंदरगाह की स्थापना के लिए प्राप्त सिद्धांत अनुमोदन में। तैयारी के तहत डीपीआर।

5.

बेलिकेरी

कर्नाटक

टेक्नो आर्थिक व्यवहार्यता रिपोर्ट (टीईएफआर) तैयार की गई।

6.

वधावन

महाराष्ट्र

तैयारी के तहत डीपीआर।

वित्त

  • सागर माला कार्यक्रम के अंतर्गत, 2015 से 2035 की अवधि के दौरान करीब 7.98500 लाख करोड़ (120 बिलियन अमरीकी डालर) के लगभग अनुमानित निवेश पर 415 परियोजनाओं को बंदरगाह आधुनिकीकरण और नए बंदरगाह विकास, बंदरगाह कनेक्टिविटी बढ़ाने, बंदरगाह से जुड़े औद्योगीकरण और चरण-वार कार्यान्वयन के लिए तटीय सामुदायिक विकास में पहचाने गए हैं।
  • सागर माला कार्यक्रम की स्वीकृत कार्यान्वयन योजना के मुताबिक इन परियोजनाओं को केंद्रीय/सरकारी एजेंसियों और राज्य सरकारों द्वारा प्राथमिक रूप से निजी/पीपीपी मोड के जरिए लिया जाना चाहिए।

क्र.सं.

परियोजना थीम

परियोजनाओं की संख्या

परियोजना लागत (रुपये करोड मे)

1.

बंदरगाह आधुनिकीकरण

189

142,828

2.

कनेक्टिविटी संवर्धन

170

230,576

3.

पोर्ट-लिंक औद्योगिकीकरण

33

420,881

4.

तटीय सामुदायिक विकास

23

4,216

कुल

415

798,500

निष्कर्ष

  • सरकार ने अगले पांच वर्ष में जलमार्गों के विकास के लिए 50 हजार करोड़ रुपये खर्च करने के संकेत दिए हैं, पर निजी क्षेत्र से अगले पांच वर्षों में जल परिवहन के लिए इसके पांच गुना निवेश की उम्मीद की गई है। यह भी जरूरी है कि इन दोनों परियोजनाओं के समय पर अच्छी गुणवत्ता वाले कार्यान्वयन को सुनिश्चित किया जाए, अन्यथा लक्ष्य अधूरे ही रह जाएंगे।